Chapter - 21 Summary
गोंडल में भगतजी महाराज ने भविष्यवाणी की और यज्ञपुरुषदासजी को ब्रह्मविद्या पूर्ण कर दूसरों को सुख देने की आज्ञा दी। महुवा में भगतजी महाराज के देहत्याग के समाचार से स्वामीश्री दुखी हुए, परंतु भगतजी ने दर्शन देकर कहा, “मैं तुममें अखंड हूँ,” और उनका शोक दूर किया। जगा भक्त ने भी अंतिम सेवा के लिए बुलाकर अक्षरपुरुषोत्तम निष्ठा प्रवर्ताने की आज्ञा दी। बाद में स्वामीश्री ने सारंगपुर मंदिर का वाहीवट संभालकर उसका विकास किया। विरोध के बावजूद वे कुशल प्रशासक और निष्ठावान सेवक सिद्ध हुए।
Last-Minute Revision Points
गोंडल में भविष्यवाणी
दूसरों को सुख देने की आज्ञा
भगतजी का देहत्याग
“मैं तुममें अखंड हूँ” आश्वासन
जगा भक्त की अंतिम आज्ञा
अक्षरपुरुषोत्तम निष्ठा का प्रचार
सारंगपुर मंदिर विकास
विरोध के बीच सफलता
Chapter - 22 Summary
स्वामीश्री सारंगपुर से गुजरात और सौराष्ट्र में अक्षरपुरुषोत्तम निष्ठा का प्रचार करते थे। जूनागढ़ में संतों की प्रेरणा से शिखरबद्ध मंदिर में स्वामी और महाराज की मूर्तियाँ प्रतिष्ठित करने का संकल्प दृढ़ हुआ। विरोध के बावजूद सारंगपुर का वाहीवट सुधरता रहा। अहमदाबाद गादी विवाद के बाद वढवाण में अलग गादी स्थापित करने हेतु संतों ने स्वामीश्री से सहयोग माँगा। स्वामीश्री ने अक्षरपुरुषोत्तम मूर्तियों की प्रतिष्ठा की शर्त पर सहायता स्वीकार की और अपने शिष्य दीवान साहेब के माध्यम से वढवाण मंदिर के लिए भूमि दिलवाई।
Last-Minute Revision Points
अक्षरपुरुषोत्तम निष्ठा का प्रचार
मूर्ति प्रतिष्ठा का संकल्प
विरोध के बीच सुधार
अहमदाबाद गादी विवाद
वढवाण में नई गादी प्रयास
स्वामीश्री का सहयोग
मूर्ति प्रतिष्ठा की शर्त
भूमि प्राप्ति
Chapter - 23 Summary
स्वामीश्री वर्ताल में रहकर अक्षर-पुरुषोत्तम निष्ठा का प्रचार करते और गुजरात में कथाएँ करके भक्तों को आनंद देते थे। वडोदरा में कथा के दौरान विरोधियों ने ईंटें फेंकी और बंगला जलाने का प्रयास किया, परंतु स्वामीश्री शांत और निर्भय रहे। फौजदार ने दोषियों को पकड़ने की बात कही, लेकिन स्वामीश्री ने किसी के विरुद्ध शिकायत करने से मना कर दिया। इस घटना से विरोध बढ़ा, फिर भी गुजरात के भक्तों ने स्वामीश्री के प्रति दृढ़ निष्ठा दिखाई और बिना उनकी सलाह कोई निर्णय न लेने की चेतावनी दी।
Last-Minute Revision Points
अक्षर-पुरुषोत्तम निष्ठा का प्रचार
वडोदरा में विरोध और ईंटबाजी
बंगला जलाने का प्रयास
स्वामीश्री की शांति
शिकायत से इंकार
विरोध बढ़ा
भक्तों की दृढ़ निष्ठा
चेतावनी पत्र
Chapter - 24 Summary
गोरधनभाई कोठारी ने स्वामीश्री को वर्ताल बुलाकर वीरसद में मंदिर के कार्य हेतु प्रेरित किया। वर्ताल में विशाल सभा में स्वामीश्री ने अक्षर-पुरुषोत्तम का महिमा बताया और वढवाण में मूर्ति प्रतिष्ठा हेतु सेवा एकत्र की। निर्मलदासजी के साथ जयपुर में मूर्तियाँ बनवाने की व्यवस्था की। भरूच में पारायण के दौरान “संत ही मोक्ष का द्वार है” सिद्धांत समझाया। उनके बढ़ते प्रभाव से विरोधी चिंतित हुए। विरोध शांत करने हेतु स्वामीश्री को सारंगपुर के प्रबंधन से मुक्त कर वर्ताल बुला लिया गया।
Last-Minute Revision Points
वर्ताल में विशाल सभा
अक्षर-पुरुषोत्तम महिमा
वढवाण हेतु सेवा
जयपुर में मूर्ति व्यवस्था
भरूच पारायण
संत मोक्ष का द्वार
विरोधियों की चिंता
सारंगपुर प्रबंधन से मुक्त
Chapter - 25 Summary
वढवाण मंदिर तैयार होने पर स्वामीश्री ने अक्षरपुरुषोत्तम निष्ठावान भक्तों को प्रतिष्ठा में सम्मिलित होने की आज्ञा दी। विरोध के बावजूद प्रथम खंड में अक्षर और पुरुषोत्तम की मूर्तियाँ स्थापित हुईं और शुद्ध उपासना का प्रारंभ हुआ। समाचार मिलने पर स्वामीश्री प्रसन्न हुए। कोठारी पहले आश्चर्यचकित हुए, पर बाद में उनकी निष्ठा से संतुष्ट हुए। विरोधियों ने उन्हें रोकने की योजना बनाई। स्वामीश्री ने बोचासन में भविष्य में शिखरबद्ध मंदिर निर्माण और मध्य मंदिर में अक्षरपुरुषोत्तम की प्रतिष्ठा का संकल्प व्यक्त किया।
Last-Minute Revision Points
वढवाण प्रतिष्ठा
विरोध के बीच मूर्ति स्थापना
शुद्ध उपासना प्रारंभ
कोठारी का परिवर्तन
विरोधियों की योजना
बोचासन शिखरबद्ध मंदिर संकल्प
मध्य में अक्षरपुरुषोत्तम


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