किशोर सत्संग प्रवीण प्रकरण–3 का सारांश

 


 

गढ़पुर में महाराज के आसन पर कुत्ते ने गंदगी कर दी थी, परंतु किसी भक्त ने उसे साफ करने का संकल्प नहीं किया। उकाखाचर ने मौन रहकर झाड़ू और पानी से स्थान साफ किया और पुनः स्नान करके श्रीहरि के दर्शन किए। श्रीहरि उनकी निःस्वार्थ सेवा से अत्यंत प्रसन्न हुए और सबको समझाया कि सच्ची सेवा वही कर सकता है जिसे भगवान का महिमा ज्ञात हो। उकाखाचर प्रतिदिन संतों और श्रीहरि के लिए मार्ग साफ करते और विनम्रता से सेवा करते थे। उनकी सेवा-भक्ति की प्रशंसा वचनामृत में भी की गई है।

4) Chapter - 3 Last-Minute Revision Points

  • आसन पर गंदगी, किसी ने साफ नहीं किया

  • उकाखाचर ने स्वयं सफाई की

  • पुनः स्नान कर दर्शन किए

  • श्रीहरि अत्यंत प्रसन्न हुए

  • भगवान का महिमा समझकर सेवा

  • प्रतिदिन मार्ग की सफाई

  • विनम्र सेवा-भाव

  • वचनामृत में प्रशंसा

0 comments