Chapter - 46 Summary
श्रीजी महाराज ने स्वामीश्री द्वारा समाधि का चमत्कार दिखाया। सबसे पहले आचार्य राधारमणप्रसाद को समाधि हुई, जिसमें उन्होंने दिव्य प्रकाश और श्रीजी महाराज, गुणातीतानंद स्वामी तथा गोपालानंद स्वामी के दर्शन किए।
स्वामीश्री के प्रभाव से संत और भक्त केवल भगवान और सत्संग की ही बातें करते थे, जिससे ओधवजीभाई ने उनका महिमा समझा।
नवागाम में गांधीजी ने स्वामीश्री से मिलकर आशीर्वाद मांगा। स्वामीश्री ने धर्म-नियम पालन की बात कही। योगी स्वामी ने देश की स्वतंत्रता के लिए माला जपी और भक्ति से देश को स्वतंत्रता मिली।
Chapter - 46 Last-Minute Revision Points
• समाधि का चमत्कार
• आचार्य राधारमणप्रसाद की समाधि
• दिव्य प्रकाश के दर्शन
• तीन स्वरूपों के दर्शन
• संतों की भगवान की बातें
• ओधवजीभाई को महिमा ज्ञात
• नवागाम प्रसंग
• गांधीजी की मुलाकात
• आशीर्वाद की मांग
• धर्म-नियम का महत्व
• योगी स्वामी की माला
• देश की स्वतंत्रता
अध्याय 47 सारांश (Hindi)
हरिभाई अमीन ने गोंडल में अक्षर डेरी की जमीन ₹25,000 में खरीदी, जबकि उसकी कीमत ₹2 लाख थी। महाराजा भगवतसिंहजी ने शर्त रखी कि डेरी यथावत रहे, मंदिर 3 वर्ष में पूरा हो और ₹10 लाख खर्च हों।
स्वामीश्री ने दिव्य ज्ञान से सब जानकर आश्वासन दिया। भूमि का अधिकार उन्हें सौंपा गया।
संवत 1988 पोष सुद 10 को खातमुहूर्त हुआ। अनेक भक्तों को समाधि और दिव्य दर्शन हुए।
3 वर्ष की शर्त के बावजूद 2.5 वर्ष में मंदिर पूरा हुआ। संवत 1990 वैशाख सुद 10 को प्रतिष्ठा हुई, जिसमें कांच टूटने का चमत्कार हुआ।
स्वामीश्री ने अक्षर डेरी को सर्वोपरी स्थान बताया और योगी स्वामी को महंत नियुक्त किया।
अध्याय 47 मुख्य बिंदु (Hindi)
• हरिभाई ने जमीन खरीदी
• कीमत ₹2 लाख → ₹25,000
• महाराजा की शर्तें
• स्वामीश्री का दिव्य ज्ञान
• जमीन का अधिकार मिला
• खातमुहूर्त (पोष सुद 10)
• समाधि के प्रसंग
• भक्तों की सेवा
• 2.5 वर्ष में मंदिर पूरा
• प्रतिष्ठा (वैशाख सुद 10)
• कांच टूटने का चमत्कार
• अक्षर डेरी का महिमा
• योगी स्वामी महंत बने
अध्याय 48 सारांश (Hindi)
संवत 1992 में अहमदाबाद में पारायण के समय वर्षा नहीं हुई। भक्तों ने प्रार्थना की। स्वामीश्री ने धर्मस्वरूपदास स्वामी को समाधि में जाकर प्रार्थना करने को कहा।
समाधि में महाराज ने वर्षा का आश्वासन दिया। पहले थोड़ी वर्षा हुई, फिर पुनः प्रार्थना पर भारी वर्षा का वचन मिला।
समाधि में एरावत हाथी पर श्रीजी महाराज, गुणातीतानंद स्वामी, गोपालानंद स्वामी, भगतजी महाराज और इन्द्र के दर्शन हुए। इसके बाद भारी वर्षा हुई।
गोंडल में पारायण के समय भगवंदास ने संकल्प किया कि महाराज के दर्शन के बाद ही भोजन करेंगे। उन्हें स्वामीश्री के स्थान पर श्रीजी महाराज के दर्शन हुए।
स्वामीश्री ने कहा कि उनका संकल्प पूर्ण हुआ और सभी को दृढ़ निश्चय हुआ कि श्रीजी महाराज शास्त्रीजी महाराज द्वारा प्रकट हैं।
अध्याय 48 मुख्य बिंदु (Hindi)
• अहमदाबाद में सूखा
• समाधि द्वारा प्रार्थना
• धर्मस्वरूपदास की समाधि
• महाराज का आश्वासन
• एरावत दर्शन
• इन्द्र सहित दर्शन
• भारी वर्षा
• श्रद्धा बढ़ी
• गोंडल पारायण
• भगवंदास का संकल्प
• श्रीजी महाराज के दर्शन
• स्वामीश्री ने पुष्टि की
अध्याय 49 सारांश (Hindi)
स्वामीश्री वडोदरा पधारे तब अटलादरा के मथुरभाई, जिनका जीवन पहले पापमय था, उनके प्रभाव से परिवर्तित हुए और मंदिर बनाने का निमंत्रण दिया।
स्वामीश्री ने श्रीजी महाराज की पावन भूमि पर मंदिर बनाने की इच्छा जताई। मथुरभाई ने वहाँ के निवासियों को स्थानांतरित कर जमीन अर्पित की।
एक प्रसंग में स्वामीश्री ने एक भक्त को नियम दिया कि स्नान करके ही भोजन करें, जिससे धर्म पालन का महत्व बताया।
स्वामीश्री ने नारायणस्वरूपदासजी को प्रेम से शिक्षा दी।
सूरत में पारायण के दौरान अनेक समाधिकालीन अनुभव हुए। प्राणामी संप्रदाय के विद्वान आचार्य कृष्णप्रियाचार्यजी प्रभावित होकर स्वामीश्री के चरणों में नतमस्तक हुए।
उन्होंने स्वीकार किया कि “स्वामी = अक्षर, नारायण = पुरुषोत्तम” और श्रीजी महाराज शास्त्रीजी महाराज द्वारा प्रकट हैं।
अध्याय 49 मुख्य बिंदु (Hindi)
• मथुरभाई का परिवर्तन
• अटलादरा मंदिर योजना
• पावन भूमि का महत्व
• जमीन दान
• शुद्धता का नियम
• धर्म पालन
• नारायणस्वरूपदासजी को शिक्षा
• सूरत पारायण
• समाधि अनुभव
• कृष्णप्रियाचार्यजी का परिवर्तन
• स्वामी = अक्षर, नारायण = पुरुषोत्तम
अध्याय 50 सारांश (Hindi)
स्वामीश्री की 80वीं जयंती बोचासन में भव्य रूप से मनाई गई। इसका विचार चंपकभाई बंकर ने दिया, जिसे सभी ने स्वीकार किया।
भक्तों ने ₹1.25 लाख अर्पण करने का निर्णय किया, परंतु स्वामीश्री ने उसे स्वीकार नहीं किया और ठाकोरजी की सेवा में लगाने को कहा।
संवत 2001 वसंत पंचमी के दिन लगभग 2 लाख भक्त उपस्थित रहे। अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने स्वामीश्री के गुणों का गुणगान किया।
बाद में अहमदाबाद में स्वामीश्री ने भागवत कथा की, जिससे सभी अत्यंत आनंदित हुए।
वैष्णव विद्वान विश्वनाथभाई ने कहा कि स्वामीश्री भगवान का साक्षात स्वरूप हैं और भागवत का सच्चा रस समझा सकते हैं।
अध्याय 50 मुख्य बिंदु (Hindi)
• 80वीं जयंती उत्सव
• चंपकभाई का विचार
• ₹1.25 लाख अर्पण
• स्वामीश्री का इंकार
• ठाकोरजी की सेवा
• वसंत पंचमी कार्यक्रम
• 2 लाख भक्त
• गुणगान
• अहमदाबाद पारायण
• भागवत कथा
• विश्वनाथभाई की प्रशंसा
• स्वामीश्री = भगवान स्वरूप


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