किशोर सत्संग प्रारंभ – प्रकरण 12 : थाल – समरी

  




🔹 विस्तृत बिंदु रूप

जीवन के लिए अन्न आवश्यक है।

अन्न सूर्य, जल और भगवान की कृपा से उत्पन्न होता है।

जो भी वस्तु हमें मिले,
उसे पहले भगवान को अर्पित करना चाहिए।

भोजन भगवान को भोग लगाकर ही ग्रहण करना चाहिए।

सद्गुरु भुमानंद स्वामी ने भाव से थाल गाया।

भगवान ने उनका भाव देखकर दर्शन दिए।

आज वही थाल सत्संग में प्रचलित है।


🔹 लास्ट मिनट रिविजन (Hindi)

अन्न भगवान की देन है।

भोग बिना भोजन नहीं करना चाहिए।

भाव से किया गया भोग स्वीकार होता है।

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