Chapter - 26 Summary
योगीजी महाराज को युवकों और बच्चों से अत्यंत प्रेम था और वे उन्हें अपना हृदय मानते थे। वे युवकों की बहुत देखभाल करते, उनसे प्रेम से बात करते और उन्हें कंठी पहनाते। उनका प्रेम माता से भी अधिक था।
वे छुट्टियों में युवकों को साथ लेकर घूमते और उन्हें वचनामृत, कीर्तन और नियम सिखाते। स्वयं सेवा करते, भोजन कराते और बीमार होने पर उनकी सेवा भी करते। सुबह जल्दी उठाकर उपासना सिखाते।
वे युवकों को व्यसनों से दूर रखकर सादा और संयमित जीवन जीने की प्रेरणा देते और उन्हें आदर्श नागरिक बनाते। उन्हें नियम-धर्म पालन और युवक मंडल में जुड़ने के लिए प्रेरित करते।
Chapter - 26 Last-Minute Revision Points
• युवक उनका हृदय
• अत्यंत प्रेम और देखभाल
• कंठी पहनाना
• छुट्टियों में साथ रखना
• वचनामृत और नियम सिखाना
• स्वयं सेवा करना
• सुबह जल्दी उठाना
• व्यसन छुड़ाना
• आदर्श जीवन की प्रेरणा
• युवक मंडल में जुड़ना
Chapter - 28 Summary
योगीजी महाराज ने स्वामिनारायण संप्रदाय के विस्तार के लिए निरंतर कार्य किया। उन्होंने गाँव-गाँव भ्रमण किया, सत्संग मंडलों की स्थापना की और पत्रों के माध्यम से मार्गदर्शन दिया।
उन्होंने यात्राएँ आयोजित कीं, तीर्थों को पवित्र किया और अनेक लोगों को सत्संग में जोड़ा। “छपैया” रेलवे स्टेशन शुरू करवाया और भव्य उत्सव मनाए। मुंबई में “अक्षर भवन” तथा अन्य मंदिरों का निर्माण कराया।
उन्होंने शास्त्रीजी महाराज की जन्मशताब्दी बड़े परिश्रम से मनाई। छात्रालय, गुरुकुल और विद्यालय स्थापित किए तथा कई ग्रंथ प्रकाशित कराए।
उन्होंने संतों को शिक्षित किया, संस्कृत अध्ययन कराया और संगीत में भी प्रशिक्षित किया। मंदिरों और शिबिरों के माध्यम से लाखों लोगों तक सत्संग पहुँचाया।
उन्होंने सभी धर्मों का सम्मान किया, किसी की निंदा नहीं की और विभिन्न धर्मों के लोगों को सत्संग में जोड़ा। अपने नियमों का पालन करते हुए महान कार्य किया।
Chapter - 28 Last-Minute Revision Points
• गाँवों में भ्रमण और विस्तार
• सत्संग मंडल स्थापना
• यात्राएँ और तीर्थ
• “छपैया” रेलवे स्टेशन
• मंदिर निर्माण
• जन्मशताब्दी उत्सव
• छात्रालय और गुरुकुल
• ग्रंथ और पत्रिका
• संतों की शिक्षा
• सर्वधर्म सम्मान
Chapter - 29 Summary
योगीजी महाराज संवत २०१२ में भक्तों के आग्रह से अफ्रीका और एडन गए। मोंबासा में मंदिर की प्रतिष्ठा की और हजारों लोगों को सत्संग में जोड़ा। कई स्थानों को तीर्थ बनाया।
उन्होंने कंपाला, जिंजा और टररो में मंदिर बनाए और संवत २०१६ में पुनः जाकर मूर्ति प्रतिष्ठा की। सात देशों में भ्रमण कर सत्संग का विस्तार किया। इंग्लैंड, अमेरिका और कनाडा में भी सत्संग का प्रसार हुआ।
संवत २०२६ में तीसरी बार अफ्रीका जाकर नैरोबी में मंदिर प्रतिष्ठा की। फिर लंदन जाकर भव्य स्वागत पाया, मंदिर में मूर्ति प्रतिष्ठा की और थेम्स नदी को पवित्र किया।
इस प्रकार योगीजी महाराज ने विश्वभर में सत्संग का प्रकाश फैलाया।
Chapter - 29 Last-Minute Revision Points
• संवत २०१२ – पहला अफ्रीका प्रवास
• मोंबासा मंदिर प्रतिष्ठा
• हजारों भक्त जुड़े
• कंपाला, जिंजा, टररो मंदिर
• संवत २०१६ – दूसरा प्रवास
• सात देशों में भ्रमण
• इंग्लैंड, अमेरिका, कनाडा में प्रसार
• संवत २०२६ – तीसरा प्रवास
• लंदन मंदिर प्रतिष्ठा
• थेम्स नदी पवित्र बनाई
Chapter - 30 Summary
विदेश यात्रा के बाद योगीजी महाराज भारत लौटे तो उनका भव्य स्वागत हुआ। मुंबई के षण्मुखानंद हॉल में सम्मान हुआ और अहमदाबाद में लाखों लोगों की उपस्थिति में शोभायात्रा निकली।
मुख्यमंत्री हितेन्द्रभाई देसाई सहित अनेक महानुभावों ने उन्हें शांति देने वाले संत के रूप में सराहा। गुजरात के अनेक शहरों में उनका सम्मान हुआ।
इतने सम्मान के बावजूद वे गुरु भक्ति और कर्तव्य में अडिग रहे। सारंगपुर, भावनगर और महुवा में महत्वपूर्ण कार्य किए।
गोंडल में शास्त्रीजी महाराज की प्रतिमा प्रतिष्ठित की और भक्तों को सुख दिया। बाद में वे बीमार पड़े और मुंबई ले जाए गए।
संवत २०२७ पोष वद एकादशी के दिन “जय स्वामिनारायण” कहकर उन्होंने देह त्याग किया। गोंडल में उनका अंतिम संस्कार हुआ और वहाँ स्मृति मंदिर बना।
Chapter - 30 Last-Minute Revision Points
• विदेश से वापसी
• मुंबई में सम्मान
• अहमदाबाद में शोभायात्रा
• मुख्यमंत्री द्वारा प्रशंसा
• गुजरात में सम्मान
• गुरु भक्ति स्थिर
• सारंगपुर, भावनगर, महुवा कार्य
• गोंडल में प्रतिमा प्रतिष्ठा
• बीमारी और मुंबई उपचार
• संवत २०२७ पोष वद एकादशी देहत्याग
• गोंडल में अंतिम संस्कार


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