तत्त्वमीमांसा (३ तत्त्व)
तत्त्वमीमांसा क्या है?
A) शरीरों का निरूपण
B) तत्त्वों का निरूपण
C) कर्मों का निरूपण
D) दर्शन का निरूपण
उत्तर: B) तत्त्वों का निरूपण
श्री स्वामिनारायण दर्शन में पाँच भिन्न तत्त्वों को स्वीकार किया गया है।
A) गलत
B) सही
उत्तर: B) सही
श्री स्वामिनारायण दर्शन में _____ तत्त्वों को स्वीकार किया गया है।
A) चार
B) छह
C) पाँच
D) तीन
उत्तर: C) पाँच
निम्न में से कौन-सा तत्त्व स्वीकार किया गया है?
A) महत्तत्त्व
B) अहंकार
C) अक्षरब्रह्म
D) प्रकृति
उत्तर: C) अक्षरब्रह्म
पाँचों तत्त्व अनादि और अनन्त हैं।
A) सही
B) गलत
उत्तर: A) सही
पाँचों तत्त्व _____ हैं।
A) अस्थायी
B) आभासी
C) नित्य
D) काल्पनिक
उत्तर: C) नित्य
पाँचों तत्त्व आभासी और काल्पनिक हैं।
A) गलत
B) सही
उत्तर: A) गलत
वचनामृत ग.प्र.७ के अनुसार कौन-से पाँच भेद अनादि हैं?
A) जीव, कर्म, माया, जन्म, मृत्यु
B) अक्षर, कर्म, जीव, शरीर, योनि
C) पुरुषोत्तम, अक्षरब्रह्म, माया, ईश्वर, जीव
D) ईश्वर, शरीर, वनस्पति, देवता, माया
उत्तर: C) पुरुषोत्तम, अक्षरब्रह्म, माया, ईश्वर, जीव
जीव चैतन्य तत्त्व है।
A) सही
B) गलत
उत्तर: A) सही
जीव _____ तत्त्व है।
A) मायिक
B) आभासी
C) जड़
D) चैतन्य
उत्तर: D) चैतन्य
जीव किन शरीरों को धारण करता है?
A) केवल देवताओं को
B) केवल मनुष्यों को
C) मनुष्यों से देवताओं तक
D) केवल प्राणियों को
उत्तर: C) मनुष्यों से देवताओं तक
जीव जन्म और मृत्यु की प्रक्रिया से निरंतर गमन करता है।
A) गलत
B) सही
उत्तर: B) सही
जीव संख्या की दृष्टि से _____ हैं।
A) अल्प
B) अनन्त
C) चार
D) सीमित
उत्तर: B) अनन्त
जीव से संबंधित दो महत्वपूर्ण सिद्धांत कौन-से हैं?
A) जन्म और मृत्यु
B) ईश्वर और जीव
C) कर्मसिद्धांत और पुनर्जन्मवाद
D) माया और अक्षरब्रह्म
उत्तर: C) कर्मसिद्धांत और पुनर्जन्मवाद
क्रियमाण कर्म अर्थात जीव की स्वतंत्रता से किए गए शुभ या अशुभ कर्म।
A) सही
B) गलत
उत्तर: A) सही
जीव जो शुभ या अशुभ कर्म करता है उसे _____ कर्म कहते हैं।
A) मुक्त
B) संचित
C) क्रियमाण
D) प्रारब्ध
उत्तर: C) क्रियमाण
संचित कर्म अर्थात पाप-पुण्यरूप संस्कारों का संचय।
A) गलत
B) सही
उत्तर: B) सही
अनन्त जन्मों के कर्मों का संचय जीव के साथ जुड़ा रहता है।
A) सही
B) गलत
उत्तर: A) सही
कर्मफलदाता परब्रह्म जीव का _____ निर्धारित करता है।
A) शरीर
B) जन्म
C) माया
D) भाग्य
उत्तर: D) भाग्य
प्रारब्ध कर्म अर्थात जीव का भाग्य।
A) गलत
B) सही
उत्तर: B) सही
जीव को बार-बार जन्म धारण करने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
A) प्रारब्ध
B) मुक्ति
C) कर्मसिद्धांत
D) पुनर्जन्मवाद
उत्तर: D) पुनर्जन्मवाद
जीव माया के बंधन से मुक्त न हो तब तक चौरासी लाख योनियों में भटकता है।
A) सही
B) गलत
उत्तर: A) सही
जीव _____ लाख प्रकार की योनियों में भटकता है।
A) बारह
B) पचास
C) चौरासी
D) साठ
उत्तर: C) चौरासी
ब्रह्मरूप होकर जीव अक्षरधाम को प्राप्त कर ले तो कर्मबंधन लागू नहीं होते।
A) गलत
B) सही
उत्तर: B) सही
मुक्त हुआ जीव किन कर्मों से मुक्त हो जाता है?
A) केवल प्रारब्ध
B) केवल संचित
C) प्रारब्ध, क्रियमाण, संचित
D) केवल क्रियमाण
उत्तर: C) प्रारब्ध, क्रियमाण, संचित
मुक्त जीव को फिर जन्म लेना पड़ता है।
A) गलत
B) सही
उत्तर: A) गलत
ईश्वर क्या है?
A) माया तत्त्व
B) अचेतन तत्त्व
C) चैतन्य तत्त्व
D) जड़ तत्त्व
उत्तर: C) चैतन्य तत्त्व
ईश्वर जीवों की अपेक्षा अधिक ऐश्वर्य और सामर्थ्य रखता है।
A) गलत
B) सही
उत्तर: B) सही
ईश्वर अर्थात जीवों से अधिक _____ रखने वाला चैतन्य तत्त्व।
A) शरीर और इन्द्रियाँ
B) ऐश्वर्य और सामर्थ्य
C) माया और बंधन
D) जन्म और मृत्यु
उत्तर: B) ऐश्वर्य और सामर्थ्य
जीवों की तरह ईश्वर भी संख्या की दृष्टि से अनन्त हैं।
A) सही
B) गलत
उत्तर: A) सही
ईश्वर _____ से बंधे हुए हैं।
A) परब्रह्म
B) जीव
C) माया
D) अक्षरब्रह्म
उत्तर: C) माया
ईश्वर सृष्टि की रचना और संचालन के कार्य में प्रवृत्त हैं।
A) गलत
B) सही
उत्तर: B) सही
ईश्वर किस कार्य में प्रवृत्त हैं?
A) केवल यज्ञ
B) सृष्टि की रचना और संचालन
C) केवल तप
D) केवल उपासना
उत्तर: B) सृष्टि की रचना और संचालन
ईश्वरों में विद्यमान सत्ता और ऐश्वर्य परब्रह्म पुरुषोत्तम नारायण के अधीन है।
A) सही
B) गलत
उत्तर: A) सही
ईश्वरों की सत्ता, ऐश्वर्य और सर्वज्ञता _____ के अधीन है।
A) जीव
B) परब्रह्म पुरुषोत्तम नारायण
C) माया
D) अक्षरब्रह्म
उत्तर: B) परब्रह्म पुरुषोत्तम नारायण
ईश्वर अक्षरब्रह्म और परब्रह्म से भी अधिक समर्थ हैं।
A) गलत
B) सही
उत्तर: A) गलत
ईश्वर अपने आत्यंतिक कल्याण के लिए कहाँ जन्म लेते हैं?
A) माया में
B) पृथ्वी पर
C) अक्षरधाम में
D) स्वर्ग में
उत्तर: B) पृथ्वी पर
ईश्वर ब्रह्म-परब्रह्म के संग से माया से पर हो जाते हैं।
A) सही
B) गलत
उत्तर: A) सही
ईश्वर _____ अवस्था प्राप्त करके अक्षरमुक्तों की पंक्ति में सम्मिलित होते हैं।
A) देहस्थिति
B) ब्राह्मीस्थिति
C) मायास्थिति
D) जीवस्थिति
उत्तर: B) ब्राह्मीस्थिति
ईश्वरों का आत्यंतिक कल्याण होने तक उनका आवागमन चलता रहता है।
A) गलत
B) सही
उत्तर: B) सही
आवागमन का क्या अर्थ है?
A) मुक्ति
B) जन्म-मरण
C) उपासना
D) ब्राह्मीस्थिति
उत्तर: B) जन्म-मरण
पाँच तत्त्वों में माया को छोड़कर सभी तत्त्व चैतन्य हैं।
A) सही
B) गलत
उत्तर: A) सही
माया _____ है।
A) ईश्वर
B) चैतन्य
C) जीव
D) जड़
उत्तर: D) जड़
माया चैतन्य तत्त्व है।
A) गलत
B) सही
उत्तर: A) गलत
माया एक ही तत्त्व होते हुए भी किस प्रकार प्रकट होती है?
A) अनेक स्वरूपों में
B) एक स्वरूप में
C) केवल जड़रूप में
D) केवल चैतन्यरूप में
उत्तर: A) अनेक स्वरूपों में
माया को मूल माया, मूल प्रकृति, महा माया आदि नामों से जाना जाता है।
A) सही
B) गलत
उत्तर: A) सही
माया का एक नाम _____ है।
A) अक्षरब्रह्म
B) महा माया
C) जीव
D) ईश्वर
उत्तर: B) महा माया
माया ही जीवों और ईश्वरों को बंधन में रखती है।
A) गलत
B) सही
उत्तर: B) सही
माया जीवों और ईश्वरों से क्या करवाती है?
A) अक्षरधाम दिलाती है
B) मुक्ति दिलाती है
C) जन्म-मरण करवाती है
D) ब्राह्मीस्थिति दिलाती है
उत्तर: C) जन्म-मरण करवाती है
माया से परे और अनादिकाल से मुक्त केवल दो तत्त्व हैं।
A) सही
B) गलत
उत्तर: A) सही
माया से परे और अनादिकाल से मुक्त दो तत्त्व कौन-से हैं?
A) माया और जीव
B) ईश्वर और माया
C) अक्षरब्रह्म और परब्रह्म
D) जीव और ईश्वर
उत्तर: C) अक्षरब्रह्म और परब्रह्म


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