प्रश्न (1-10)
तत्त्वज्ञान अर्थात _____ का ज्ञान।
जिसकी उत्पत्ति नहीं, जिसका विनाश नहीं ऐसे _____ तत्त्वों का ज्ञान।
भारत में तत्त्वज्ञान केवल बौद्धिक चर्चा और _____ का विषय नहीं है।
अनुभव और साक्षात्कार के लिए संस्कृत में _____ शब्द का प्रयोग होता है।
तत्त्वज्ञान को आचरण में उतारकर अनेक मुमुक्षु भगवान के _____ के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं।
शुद्ध संप्रदाय की रचना के लिए _____ का आधार आवश्यक है।
स्पष्ट तत्त्वज्ञान के बिना भावुकों का समूह संप्रदाय नहीं बल्कि _____ कहलाता है।
भारतीय वेदान्त परंपरा में _____, उपनिषद और ब्रह्मसूत्र का आधार लिया जाता है।
तीन शास्त्र _____ के रूप में जाने जाते हैं।
भगवान स्वामिनारायण ने _____ ग्रंथ में विशिष्ट तत्त्वज्ञान दिया है।
उत्तर
तत्त्वों
नित्य
वाद-विवाद
दर्शन
साक्षात्कार
तत्त्वज्ञान
पंथ
श्रीमद्भगवद्गीता
प्रस्थानत्रयी
वचनामृत
प्रश्न (11-20)
ब्रह्मस्वरूप _____ महाराज ने बी.ए.पी.एस. स्वामिनारायण संस्था की स्थापना की।
'श्री स्वामिनारायण भाष्यग्रंथों' के लेखक साधु _____ हैं।
अक्षरपुरुषोत्तम उपासना अर्थात अक्षररूप होकर _____ की उपासना करना।
अक्षररूप होना अर्थात _____ जैसी स्थिति प्राप्त करना।
अक्षरपुरुषोत्तम उपासना स्वामिनारायण भगवान द्वारा दिए गए तत्त्वज्ञान का _____ सिद्धांत है।
परब्रह्म की _____ भाव से उपासना करनी चाहिए।
ब्रह्मज्ञान _____ को प्राप्त करने का निर्विघ्न मार्ग है।
संक्षेप में, अक्षररूप होकर _____ की उपासना करनी चाहिए।
स्वामिनारायण संप्रदाय के तत्त्वज्ञान के मुख्य आधारभूत ग्रंथों में भगवान श्री स्वामिनारायण के _____ सम्मिलित हैं।
अक्षरब्रह्म श्री _____ स्वामी की वचनामृत समान बातें मुख्य ग्रंथों में सम्मिलित हैं।
उत्तर
शास्त्रीजी
भद्रेशदास
पुरुषोत्तम
अक्षरब्रह्म
मूल
स्वामी-सेवक
परमपद
पुरुषोत्तम
वचनामृत
गुणातीतानंद
प्रश्न (21-30)
अक्षरब्रह्म गुणातीतानंद स्वामी ने अपनी _____ द्वारा सिद्धांत समझाया है।
गुणातीतानंद स्वामी ने भगवान स्वामिनारायण के सिद्धांत को अधिक _____ शब्दों में समझाया है।
तत्त्वमीमांसा अर्थात तत्त्वज्ञान में स्वीकार किए गए _____ का निरूपण।
श्री स्वामिनारायण दर्शन में _____ भिन्न तत्त्वों को स्वीकार किया गया है।
पाँचों तत्त्व अनादि और अनंत अर्थात् _____ हैं।
पाँचों तत्त्व सत्य और वास्तविक हैं, परंतु आभासी या _____ नहीं हैं।
पुरुषोत्तम भगवान, अक्षरब्रह्म, माया, ईश्वर और जीव ये पाँच _____ अनादि हैं।
जीव एक _____ तत्त्व है।
जीव जन्म और मृत्यु की प्रक्रिया द्वारा एक शरीर से दूसरे शरीर में _____ करता है।
जीव संख्या की दृष्टि से _____ हैं।
उत्तर
बातों
सरल
तत्त्वों
पाँच
नित्य
काल्पनिक
भेद
चैतन्य
गति
अनंत
प्रश्न (31-40)
जीव से संबंधित दो महत्त्वपूर्ण सिद्धांत हैं – कर्मसिद्धांत और _____।
जीव जो शुभ या अशुभ कर्म करता है उन्हें _____ कर्म कहते हैं।
जीव के पाप-पुण्यरूप संस्कारों के संचय को _____ कर्म कहते हैं।
अनंत जन्मों के कर्मों का _____ जीव के साथ जुड़ा रहता है।
कर्मफलदाता _____ जीव का प्रारब्ध बनाते हैं।
जीव के भाग्य को _____ कर्म कहा जाता है।
जीव के बार-बार जन्म धारण करने की क्रिया को _____ कहते हैं।
माया के बंधन से मुक्त न होने तक जीव _____ लाख योनियों में भटकता है।
जीव कर्मों के _____ रूपी फल भोगने के लिए योनियों में भटकता है।
जीव जब _____ होकर अक्षरधाम को प्राप्त करता है तब कर्मबंधन से मुक्त हो जाता है।
उत्तर
पुनर्जन्मवाद
क्रियमाण
संचित
संचय
परब्रह्म
प्रारब्ध
पुनर्जन्मवाद
चौरासी
सुख-दुःख
ब्रह्मरूप
प्रश्न (41-50)
आत्यंतिक मुक्ति रूप _____ को प्राप्त करने के बाद कर्मबंधन लागू नहीं होता।
मुक्त हुआ जीव प्रारब्ध, क्रियमाण और _____ कर्मों से मुक्त हो जाता है।
मुक्त हुए जीव को फिर _____ नहीं लेना पड़ता।
परब्रह्म पाँचों तत्त्वों में _____ तत्त्व है।
परब्रह्म को परमेश्वर, पुरुषोत्तम, परमात्मा और _____ शब्दों से जाना जाता है।
परब्रह्म अर्थात भगवान _____ हैं।
भगवान के दिव्य गुणों को आत्मसात करने को भगवान का _____ प्राप्त करना कहते हैं।
भगवान का साधर्म्य प्राप्त करने के बाद भी _____ भगवान के साथ स्वामी-सेवक भाव रहता है।
भगवान के अवतार अनेक हैं, परंतु परब्रह्म भगवान _____ ही हैं।
अनंत कोटि ब्रह्मांड की उत्पत्ति, स्थिति और _____ के कर्ता परब्रह्म हैं।
उत्तर
अक्षरधाम
संचित
जन्म
सर्वोच्च
भगवान
एक
साधर्म्यपन
अक्षरब्रह्म
एक
प्रलय
प्रश्न (51-60)
भगवान सबके प्रेरक, शक्तिदाता, कर्मफलदाता और _____ हैं।
परब्रह्म को _____ कहा जाता है क्योंकि वे सबके कर्ता हैं।
परमेश्वर देश, काल, कर्म और _____ के प्रेरक हैं।
परब्रह्म-भगवान सदा दिव्य _____ हैं।
भगवान का आकार _____ के आकार जैसा है।
भगवान के अंग _____ हैं, पंचभूतों से बने हुए नहीं हैं।
भगवान में _____ का लेश भी नहीं है।
भगवान की मूर्ति अत्यंत _____ है।
भगवान की मूर्ति _____ है, फिर भी अत्यधिक तेज के कारण श्वेत दिखाई देती है।
भगवान की मूर्ति _____ है और दो चरण रखती है।
उत्तर
नियामक
सर्वकर्ताहर्ता
माया
साकार
मनुष्य
दिव्य
माया
प्रकाशमय
घनश्याम
द्विभुज
प्रश्न (61-70)
भगवान की मूर्ति अत्यंत _____ है।
भगवान की आकृति _____ जैसी है।
भगवान की मूर्ति _____ है।
परब्रह्म सर्वकर्ता और _____ होने से सर्वोपरि हैं।
परब्रह्म पाँच तत्त्वों में सबसे _____ हैं।
भगवान स्वामिनारायण सभी अवतारों के _____ हैं।
वचनामृत गढ़ड़ा अंत्य 38 अनुसार भगवान सभी कारणों के भी _____ हैं।
भगवान स्वामिनारायण जीवों को _____ बनाकर आत्यंतिक मुक्ति देते हैं।
भगवान स्वामिनारायण के प्राकट्य का मुख्य उद्देश्य जीवों के _____ के लिए है।
भगवान स्वामिनारायण ने योगियों को भी दुर्लभ _____ कराई थी।
उत्तर
सौम्य
मनुष्य
किशोर
सर्वनियंता
परे
अवतारी
कारण
ब्रह्मरूप
आत्यंतिक कल्याण
समाधि
प्रश्न (71-80)
भगवान स्वामिनारायण ने केवल 28 वर्षों में लाखों _____ को नियमबद्ध किया था।
भगवान स्वामिनारायण के दिव्य आकर्षण से एक ही रात में _____ परमहंस बने थे।
महाराज ने परमहंसों को _____ कठिन प्रकरणों से गुजराया था।
समर्थ परमहंसों की कुल संख्या लगभग _____ थी।
स्वरूपानंद स्वामी ने _____ के कुंड खाली करवाए थे।
व्यापकानंद स्वामी ने मरी हुई _____ को जीवित किया था।
गोपालानंद स्वामी ने _____ रोक दिया था।
भादरा में वशराम सुथार के संकल्प से अनंत कीटों ने _____ देह धारण की थी।
भगवान स्वामिनारायण ने अपने जीवनकाल में ही अपने नाम का _____ कराया था।
भगवान स्वामिनारायण ने वर्ताल में दक्षिण शिखर में अपनी मूर्ति _____ नाम से प्रतिष्ठित की।
उत्तर
सत्संगियों
500
108
3000
नरक
घोड़ी
चंद्रग्रहण
चतुर्भुज
भजन
हरिकृष्ण महाराज
प्रश्न (81-90)
अपने जीवनकाल में ही अपनी मूर्ति प्रतिष्ठित करना भगवान स्वामिनारायण का _____ कार्य था।
भगवान स्वामिनारायण ने अपने सहज संपर्क और उपदेश से सैकड़ों लोगों को _____ बनाया था।
श्रीहरि के सान्निध्य में अनेक भक्त _____ स्थिति को प्राप्त हुए थे।
लाडूबा, जीवूबा, झमकूबा और राजबाई _____ निष्ठ स्त्रीभक्त थीं।
गढ़ड़ा के _____ राज्य में रहकर भी निर्लेप भक्त थे।
धर्मपुर की _____ निर्वासनिक स्थिति को प्राप्त हुई थीं।
अगतराई के _____ खेती करते हुए भी श्रीहरि की मूर्ति का अखंड दर्शन करते थे।
मांगरोल के _____ शक्कर और नमक को समान भाव से ग्रहण करते थे।
जोबन पगी जैसे अनेक _____ एकांतिक स्थिति को प्राप्त हुए थे।
जेतलपुर की _____ भी श्रीहरि के योग में आकर कल्याण को प्राप्त हुई।
उत्तर
अभूतपूर्व
ब्रह्मरूप
जीवनमुक्त
ब्रह्मचर्य
दादाखाचर
कुशलकुंवरबा
पर्वतभाई
गोरधनभाई
लुटेरे
गणिका
प्रश्न (91-100)
छाणी के हरिजन _____ भगत की आध्यात्मिक स्थिति असाधारण थी।
लीमली के _____ भक्त की आध्यात्मिक स्थिति भी सामान्य नहीं थी।
श्रीहरि ने कहा कि पूर्व अवतारों ने असुरों का _____ किया था।
संतों ने कहा कि श्रीहरि ने असुरों का नहीं बल्कि _____ का नाश किया है।
काम, क्रोध और लोभ को भक्तचिंतामणि में _____ कहा गया है।
जो काम-क्रोध आदि दोषों का नाश करे वह _____ का अवतारी कहलाता है।
श्रीहरि ने आश्रितों को हरिकृष्ण महाराज को ध्येय और _____ मानकर उपासना करने की आज्ञा दी।
भगवान स्वामिनारायण ने अपने भक्तों को अंतकाल में _____ आने का वचन दिया है।
भगवान स्वामिनारायण ने अपने भक्तों के _____ कल्याण का वचन दिया है।
यदि हमारा वचन मानोगे तो हम जिस _____ से आए हैं वहाँ ले जाएंगे।
उत्तर
तेजा
सगराम
संहार
आसुरीभाव
चांडाल
अवतार
उपास्य
ले जाने
आत्यंतिक
धाम
प्रश्न (101-110)
वचनामृत _____ के अनुसार भगवान ने कल्याण का वचन दिया है।
भक्तचिंतामणि में श्रीहरि ने अपने जनों को _____ लेने आने का वचन दिया है।
श्रीहरि के समय से आज तक ऐसे _____ प्रसंग दर्ज हुए हैं।
भगवान स्वामिनारायण अक्षरब्रह्म गुणातीत _____ की परंपरा द्वारा प्रगट रहते हैं।
श्रीहरि के स्वधामगमन के बाद भी वे गुणातीत _____ द्वारा प्रगट रहे हैं।
आत्यंतिक मुक्ति का _____ मार्ग चलता रहा है।
गुणातीत सत्पुरुष श्रीहरि के _____ स्वरूप समान हैं।
श्रीहरि के समकालीन संतों को मिलने वाला _____ सुख आज भी प्राप्त होता है।
भगवान स्वामिनारायण के जीवन और कार्य का _____ विचार करें तो सर्वोपरीपन दृढ़ होता है।
भगवान स्वामिनारायण सदा _____ हैं।
उत्तर
जेतलपुर-5
अंतकाल में
सैकड़ों
सत्पुरुषों
संत
मुख्य
प्रत्यक्ष
दिव्य
सूक्ष्मता से
सदा
प्रश्न (111-120)
प्रगट भगवान की _____ समझना अत्यंत आवश्यक है।
प्रगट भगवान के योग से _____ कल्याण प्राप्त किया जा सकता है।
'मुद्दा हाथ आया और कोई काल में वह _____ के मार्ग से न गिरे।'
अनंत जीवों के _____ के लिए पृथ्वी पर भगवान का प्रगटपन आवश्यक है।
भगवान स्वामिनारायण ने विक्रम संवत _____ में देहत्याग किया था।
भगवान गुणातीत _____ द्वारा इस पृथ्वी पर प्रगट रहते हैं।
ज्ञान, भक्ति और वैराग्ययुक्त भक्त के _____ में भगवान निवास करते हैं।
समर्थ भगवान के भक्त संत अनंत _____ का उद्धार करते हैं।
समर्थ भगवान के भक्त संत और भगवान में कोई _____ नहीं है।
ऐसे संत का दर्शन होने पर साक्षात् _____ का दर्शन हुआ ऐसा मानना चाहिए।
उत्तर
आवश्यकता
आत्यंतिक
कल्याण
मोक्ष
1886
सत्पुरुष
हृदय
जीवों
भेद
भगवान
प्रश्न (121-130)
भगवान के अंतर्धान के बाद _____ द्वारा कल्याण का मार्ग चलता रहता है।
भगवान प्रत्यक्ष न हों तब भगवान को प्राप्त _____ का आश्रय करना चाहिए।
संत के आश्रय से भी जीव का _____ होता है।
भगवान स्वामिनारायण जिस संत द्वारा प्रगट हैं वह संत _____ हैं।
एक समय में भगवान केवल एक ही _____ द्वारा प्रगट रहते हैं।
वचनामृत ग.प्र.-41 अनुसार भगवान जैसे _____ में रहे हैं वैसे अन्य किसी में नहीं।
अक्षरब्रह्म _____ पात्र होने से भगवान उसमें विशेष रूप से प्रगट रहते हैं।
वचनामृत लोया-15 में _____ के प्रकाश का दृष्टांत दिया गया है।
रेत, मिट्टी, पानी और काँच में प्रकाश अलग-अलग झलकता है क्योंकि _____ का भेद है।
अक्षरब्रह्म _____ से पर हैं।
उत्तर
संत
साधु
कल्याण
अक्षरब्रह्म
संत
अक्षरब्रह्म
श्रेष्ठ
सूर्य
पात्र की सामर्थ्य
माया
प्रश्न (131-140)
भगवान का सम्यक् प्रगटपन केवल _____ द्वारा कहा जाता है।
आज भी लक्षणयुक्त _____ द्वारा भगवान अखंड प्रगट हैं।
भगवान स्वामिनारायण ने अक्षरब्रह्म के रूप में _____ स्वामी का महिमा बताया था।
गुणातीत गुरु परंपरा में गुणातीतानंद स्वामी के बाद प्रथम _____ महाराज आते हैं।
भगतजी महाराज के बाद _____ महाराज आते हैं।
शास्त्रीजी महाराज के बाद _____ महाराज आते हैं।
योगीजी महाराज के बाद _____ महाराज आते हैं।
वर्तमानकाल में प्रगट अक्षरब्रह्म के रूप में _____ महाराज विराजमान हैं।
तत्त्वपंचक में माया से परे और परब्रह्म के बाद दूसरे स्थान पर आने वाला तत्त्व _____ है।
अक्षरब्रह्म के लिए अक्षर, मूल अक्षर, अनादि अक्षर और _____ जैसे नाम प्रयुक्त होते हैं।
उत्तर
अक्षरब्रह्म
संत
गुणातीतानंद
भगतजी
शास्त्रीजी
योगीजी
प्रमुखस्वामी
महंतस्वामी
अक्षरब्रह्म
ब्रह्म
प्रश्न (141-150)
'अक्षरात् परतः परः' के अनुसार अक्षरब्रह्म से परे _____ हैं।
उपासक के लिए अक्षरब्रह्म _____ के समान है।
परब्रह्म भगवान स्वामिनारायण ने अक्षरब्रह्म का _____ निरूपण किया है।
मुक्ति और भगवान के साक्षात्कार के लिए _____ को समझना अनिवार्य है।
अक्षरब्रह्म को समझे बिना भगवान का _____ नहीं होता।
'ब्रह्मविद् आप्नोति परम्' के अनुसार ब्रह्म को जानने वाला _____ को प्राप्त करता है।
स्वामिनारायण दर्शन का मूल सिद्धांत _____ होना और पुरुषोत्तम की भक्ति करना है।
'ब्रह्म वेद ब्रह्मैव भवति' के अनुसार ब्रह्म को जानने वाला _____ बनता है।
ब्रह्म का संग करने से ब्रह्म का _____ जीव में आता है।
अक्षरब्रह्म जीव, ईश्वर, माया और _____ से भिन्न तत्त्व है।
उत्तर
परब्रह्म
सेतु
यथार्थ
अक्षरब्रह्म
निश्चय
परब्रह्म
अक्षररूप
ब्रह्मरूप
गुण
परब्रह्म
प्रश्न (151-160)
अक्षरब्रह्म एक और _____ है।
परब्रह्म पुरुषोत्तम नारायण अक्षरब्रह्म से _____ हैं।
अक्षरब्रह्म परब्रह्म का _____ नहीं है।
वचनामृत ग.प्र.-45 में परब्रह्म के तेज को _____ ब्रह्म कहा गया है।
अक्षरब्रह्म अनादिकाल से _____ से पर है।
अक्षरब्रह्म परब्रह्म के _____ हैं।
अक्षरब्रह्म अनंत कोटि ब्रह्मांडों के आधार, नियंता, द्रष्टा और _____ हैं।
अक्षरब्रह्म स्वयं स्वतंत्र नहीं बल्कि _____ के अधीन हैं।
अक्षरब्रह्म एक और अद्वितीय हैं, वे मेरे सर्वोत्तम _____ हैं।
भगवान स्वामिनारायण अक्षरब्रह्म को _____ स्वामी के रूप में साथ लाए थे।
उत्तर
अद्वितीय
न्यारे
तेज
सच्चिदानंद
माया
सेवक
शास्ता
परब्रह्म
सेवक
गुणातीतानंद
प्रश्न (161-170)
इस लोक में प्रकट अक्षरब्रह्म के रूप में _____ स्वामी का उल्लेख हुआ है।
'जहाँ सद्गुरु खेले वसंत' प्रसंग में श्रीजीमहाराज ने गुणातीतानंद स्वामी को _____ कहा था।
'जुगो जुग जीओ ऐसे जोगी' शब्द श्रीजीमहाराज ने _____ के लिए कहे थे।
श्रीजीमहाराज ने गुणातीतानंद स्वामी को अपने _____ के रूप में पहचान कराया था।
श्रीजीमहाराज ने कहा कि गुणातीतानंद स्वामी अखंड हमारी _____ धारण किए हुए हैं।
श्रीजीमहाराज ने कहा कि गुणातीतानंद स्वामी हमारे जैसी _____ प्राप्त करेंगे।
श्रीजीमहाराज ने कहा कि गुणातीतानंद स्वामी हमारा सर्वोपरि _____ प्रवर्तित करेंगे।
'श्रीहरिलीलाकल्पतरु' ग्रंथ _____ महाराज ने तैयार करवाया था।
पोषी पूर्णिमा, संवत 1866 में मूलजी शर्मा को _____ दी गई थी।
श्रीहरि ने मूलजी शर्मा को अपना मूर्तिमान _____ कहा था।
उत्तर
गुणातीतानंद
मूल अक्षर
गुणातीतानंद स्वामी
अक्षरब्रह्म
मूर्ति
महिमा
ज्ञान
रघुवीरजी
दीक्षा
अक्षरब्रह्मधाम
प्रश्न (171-180)
मूलजी शर्मा श्रीहरि का _____ धाम हैं।
मालजी सोनी से गोपालानंद स्वामी ने कहा कि गुणातीतानंद स्वामी ही _____ हैं।
नृसिंहानंद स्वामी ने कहा कि गुणातीतानंद स्वामी स्वयं _____ हैं।
श्रीविहारीलालजी महाराज ने गुणातीतानंद स्वामी को _____ मूर्ति कहा है।
'अक्षरमूर्ति गुणातीतानंद स्वामी' शब्द _____ ग्रंथ में आते हैं।
वंथली में देवजीभाई से स्वामी ने कहा, 'यह तुम्हारे घर में बैठा है, वही _____ है।'
स्वामी की बातों के अनुसार 'महाराज को पुरुषोत्तम जानना और इस साधु को _____ जानना।'
गुणातीतानंद स्वामी के अक्षरब्रह्म-स्वरूप के लिए संप्रदाय में _____ प्रमाण उपलब्ध हैं।
गुणातीतानंद स्वामी के नाम के आगे “मूल अक्षर” अथवा “_____” लिखा हुआ मिलता है।
गुणातीतानंद स्वामी के अग्निसंस्कार का स्थान “_____” के नाम से प्रसिद्ध है।
उत्तर
मूल अक्षर
अक्षर
अक्षरधाम
अक्षरमूर्ति
कीर्तनकौस्तुभमाला
अक्षर
अक्षर
ऐतिहासिक
अनादि मूल अक्षर
अक्षर देरी
प्रश्न (181-190)
अक्षरब्रह्म गुणातीतानंद स्वामी ने कहा, “मैं तो _____ हूँ।”
अक्षरब्रह्म पृथ्वी पर _____ गुरु-परंपरा स्वरूप प्रगट रहता है।
योगीजी महाराज ने कहा कि अक्षरब्रह्म पृथ्वी पर सदैव _____ रहता है।
अनादि गुणातीत में महाराज रहे हैं, अभी भी हैं और _____ भी रहेंगे।
यह ब्रह्मांड रहेगा तब तक अक्षरब्रह्म _____ गुरु-परंपरा स्वरूप प्रगट रहेगा।
गुणातीतानंद स्वामी के बाद प्रथम _____ महाराज प्रगट हुए।
योगीजी महाराज के बाद _____ महाराज स्वरूप अक्षरब्रह्म प्रगट रहे।
वर्तमान में प्रगट ब्रह्मस्वरूप _____ महाराज विराजमान हैं।
ब्राह्मीस्थिति, एकांतिक स्थिति और गुणातीत स्थिति के लक्षण प्रगट _____ के जीवन में सहज सिद्ध होते हैं।
आत्यंतिक कल्याण के लिए मुमुक्षु को प्रगट _____ के प्रति दृढ़ प्रीति रखनी चाहिए।
उत्तर
चिरंजीव
गुणातीत
विराजमान
भविष्य में
गुणातीत
भगतजी
प्रमुखस्वामी
महंतस्वामी
अक्षरब्रह्म
अक्षरब्रह्मस्वरूप गुरुहरि
प्रश्न (191-200)
यह शरीर मुक्ति का साधन है, केवल _____ का साधन नहीं है।
दुर्लभ और नश्वर ऐसा यह शरीर बार-बार _____ नहीं मिलता।
सभी दोषों को टालने, ब्रह्मस्थिति प्राप्त करने और भगवान की _____ करने के लिए यह शरीर मिला है।
यह सब _____ करने से अवश्य प्राप्त होता है।
मुमुक्षुओं को सदा _____ करना चाहिए।
सत्संगियों को कभी _____ नहीं करनी चाहिए।
धर्म के लिए भी _____ कभी नहीं करनी चाहिए।
मनुष्य, पशु, पक्षी आदि किसी भी जीव की _____ नहीं करनी चाहिए।
_____ परम धर्म है।
हिंसा _____ है।
उत्तर
भोग
मिलता
भक्ति
सत्संग
सत्संग
चोरी
चोरी
हिंसा
अहिंसा
अधर्म
प्रश्न (201-210)
मन, वचन या कर्म से हिंसा करने पर उसमें स्थित _____ भगवान दुःखी होते हैं।
भगवान सर्वकर्ता, दयालु और सबका _____ करने वाले हैं।
भगवान ही सदा मेरे सभी _____ दूर करने वाले हैं।
भगवान जो करते हैं वह सदा _____ के लिए होता है।
उनकी इच्छा ही मेरा _____ है।
वे ही मेरे _____ हैं।
बाह्य और आंतरिक सभी प्रकार की _____ का पालन करना चाहिए।
श्रीहरि को _____ प्रिय है।
शुद्धिवान मनुष्य पर श्रीहरि _____ होते हैं।
_____ किए बिना भोजन नहीं करना चाहिए।
उत्तर
स्वामिनारायण
रक्षण
संकट
अच्छे
प्रारब्ध
तारक
शुद्धि
शुद्धि
प्रसन्न
पूजा
प्रश्न (211-220)
यात्रा में भी _____ का त्याग नहीं करना चाहिए।
घर के सदस्यों को प्रतिदिन मिलकर _____ करनी चाहिए।
घरसभा में भजन, गोष्ठी तथा _____ का वाचन करना चाहिए।
सभी सत्संगियों को प्रतिदिन निकट स्थित _____ में दर्शन करने जाना चाहिए।
सुबह, शाम या अपने _____ समय में मंदिर दर्शन के लिए जाना चाहिए।
सत्संग की दृढ़ता के लिए प्रत्येक _____ सभा में जाना चाहिए।
सभा निकट स्थित मंदिर या _____ में भरनी चाहिए।
सत्संग की _____ के लिए नियमित सभा में जाना चाहिए।
पूजा किए बिना पानी आदि भी _____ नहीं चाहिए।
घरसभा में शास्त्रों का _____ करना चाहिए।
उत्तर
पूजा
घरसभा
शास्त्रों
मंदिर
अनुकूल
सप्ताह
मंडल
दृढ़ता
पीना
वाचन
प्रश्न (221-230)
हमारे इष्टदेव, गुरु और _____ एक ही हैं।
हमारी सदा _____ है।
भगवान सदा सर्वकर्ता, साकार और _____ हैं।
अक्षरब्रह्मस्वरूप _____ द्वारा भगवान सदा प्रगट रहते हैं।
अक्षरब्रह्म गुरु के प्रति दृढ़ _____ और आत्मबुद्धि रखनी चाहिए।
अक्षरब्रह्म गुरु की सेवा तथा _____ करना चाहिए।
अपने आत्मा को _____ रूप मानना चाहिए।
निंदा, लज्जा, भय या कठिनाइयों के कारण कभी _____ का त्याग नहीं करना चाहिए।
भगवान और भक्तों की सेवा अपने _____ के लिए करनी चाहिए।
सत्संग और भजन के बिना व्यर्थ _____ नहीं बिताना चाहिए।
उत्तर
सिद्धांत
एकता
सर्वोपरी
गुरु
प्रीति
ध्यान
ब्रह्म
सत्संग
मोक्ष
काल
प्रश्न (231-240)
सदैव _____ तथा प्रमाद का त्याग करना चाहिए।
भजन करते-करते _____ करनी चाहिए।
आज्ञा अनुसार क्रिया करने से क्रिया का _____ नहीं आता।
हमें अक्षर और _____ दोनों यहीं प्राप्त हुए हैं।
अक्षरब्रह्म गुरु के _____ आत्मसात करने चाहिए।
परब्रह्म की अनुभूति के लिए गुरु के _____ का मनन करना चाहिए।
ब्रह्म और परब्रह्म के _____ की बातें निरंतर करनी चाहिए।
मुमुक्षु को सत्संगियों के प्रति _____ भाव रखना चाहिए।
भगवान और गुरु की _____ का सदैव पालन करना चाहिए।
आज्ञा को सदैव आनंद, उत्साह और _____ के साथ पालन करना चाहिए।
उत्तर
आलस्य
क्रिया
मान
पुरुषोत्तम
गुण
प्रसंगों
महिमा
सुहृद
आज्ञा
महिमा
प्रश्न (241-250)
सब कुछ स्वामिनारायण भगवान की _____ से मेरे हित के लिए होता है।
स्वामिनारायण भगवान तथा गुरु को प्रतिदिन _____ करनी चाहिए।
मैं अक्षर हूँ, पुरुषोत्तम का _____ हूँ।
द्वेष से भरी कुत्सित _____ नहीं बोलनी चाहिए।
हित करने वाला _____ बोलना चाहिए।
किसी के साथ विवाद या _____ नहीं करना चाहिए।
सदैव _____ से व्यवहार करना चाहिए।
गृहस्थ सत्संगी को _____ की सेवा करनी चाहिए।
प्रतिदिन माता-पिता के _____ में नमस्कार करना चाहिए।
पुरुषों और स्त्रियों को _____ दृष्टि नहीं रखनी चाहिए।
उत्तर
इच्छा
प्रार्थना
दास
वाणी
सत्य
कलह
विवेक
माता-पिता
चरणों
कु
प्रश्न (251-260)
निकट संबंध न रखने वाली स्त्री का _____ नहीं करना चाहिए।
अश्लील _____ कभी नहीं देखना चाहिए।
कामवासना बढ़ाने वाली _____ या गीत नहीं सुनने चाहिए।
सत्संगी को _____ नहीं करना चाहिए।
दिया हुआ _____ निभाना चाहिए।
विदेश या अन्य स्थान पर जाएँ तब भी _____ करना चाहिए।
विद्यार्थी को अपना अध्ययन _____ चित्त से करना चाहिए।
कुमार तथा युवा अवस्था में विशेष _____ रखना चाहिए।
शक्ति का नाश करने वाले अनुचित _____ का त्याग करना चाहिए।
शक्ति का नाश करने वाले अनुचित स्पर्श और _____ का त्याग करना चाहिए।
उत्तर
स्पर्श
दृश्य
बातें
विश्वासघात
वचन
सत्संग
स्थिर
संयम
स्पर्श
दृश्य
प्रश्न (261-271)
अच्छा फल देने वाला और _____ करने वाला साहस करना चाहिए।
केवल अपने मन और लोगों का _____ करने वाला साहस नहीं करना चाहिए।
जो प्रयास अवश्य करना हो उसमें कभी _____ नहीं करनी चाहिए।
भगवान के प्रति _____ और प्रीति रखनी चाहिए।
प्रतिदिन _____ करनी चाहिए और सत्संग करना चाहिए।
इस संसार में _____ बलवान है।
जैसा संग होता है वैसा _____ बनता है।
अच्छे _____ का संग करना चाहिए।
_____ का पूर्ण त्याग करना चाहिए।
मुमुक्षु हरिभक्तों को सत्संग में रहे हुए _____ को भी पहचानना चाहिए।
कभी _____ का संग नहीं करना चाहिए।
उत्तर
उन्नति
रंजन
आलस्य
श्रद्धा
पूजा
संग
जीवन
मनुष्यों
कुसंग
कुसंग
कुसंग


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